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हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच का संबंध

हमारे मन-शरीर का संबंध मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच की अतिव्याप्ति (ओवरलैप) का वर्णन करता है। अपनी पूरी देखभाल करने से हमारी सेहत में काफी सुधार आ सकता है।

हम में से कई लोग मन और शरीर को दो अलग-अलग चीजें समझते हैं। हम इनका इलाज भी अलग-अलग तरीके से करते हैं, शारीरिक परेशानियों के लिए डॉक्टर और मानसिक समस्याओं के लिए थेरेपिस्ट के पास जाते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक दोनों के बीच अधिक से अधिक अतिव्याप्ति (ओवरलैप) पा रहे हैं।

एक स्वस्थ दिमाग आपके शरीर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है, और एक स्वस्थ शरीर आपके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है। ये दोनों क्षेत्र मिलकर एक इकाई बनाते हैं जिसे मन-शरीर का संबंध कहते हैं। मन-शरीर संबंध एक उपश्रेणी है जिसे एमएचक्यू (मानसिक स्वास्थ्य भागफल) में मापा जाता है। इस महत्वपूर्ण रिश्ते की देखभाल करने से समग्र स्वास्थ्य में काफी सुधार आ सकता है।

स्वस्थ मन-शरीर संबंध होने का मतलब है कि आप आम तौर पर:

  • रात को अच्छी नींद लेकर सुबह तरो ताज़ा महसूस करें
  • अपने शरीर की गतिविधियों का मेल बिठा सकें (जैसे कि आँख और हाथ का अच्छा समन्वय होना)
  • दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक ऊर्जा रखें
  • अपने खाने की आदतों की जाँच करते रहें ताकि आप एक स्थिर और स्वस्थ शरीर के वजन को बनाए रख सकें
  • बढ़िया तरीके से तनाव का सामना कर पाएँ

यदि आपको अपने मन और शरीर के संबंध में कठिनाई है, तो आप इनका अनुभव कर सकते हैं:

  • अक्सर सर्दी, खांसी या संक्रमण (इन्फेक्शन) से पीड़ित होना
  • बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के शारीरिक लक्षण (जैसे पाचन संबंधी समस्याएं) होना
  • पुरानी बीमारी या बार-बार दर्द का अनुभव होना
  • अक्सर थका-टूटा महसूस करना
  • यौन रुचि में कमी आना

मन-शरीर के संबंध को समझना

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आपका मन और शरीर परस्पर एक दुसरे को प्रभावित करते हैं। इनमे से एक तरीका है हमारे पेट के स्वास्थ्य और हमारे मानसिक स्वास्थ्य के बीच का दोतरफा संबंध – कुछ ऐसा जो आंत-मस्तिष्क अक्ष के माध्यम से नियंत्रित होता है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि आपकी मानसिक स्थिति शारीरिक लक्षणों को प्रभावित कर सकती है जो आप अपने पेट में अनुभव करते हैं और इसके विपरीत, आपकी आंत (अंतड़ियों) का स्वास्थ्य आपकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

अन्य साक्ष्य भी प्रतिरक्षा कार्यप्रणाली (इम्यून फंक्शनिंग) और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होने का सुझाव देते हैं, विशेष रूप से अवसाद जैसे विकारों में पाए जाने वाले मनोदशा के लक्षण। यह फिर से इस संबंध की दो-तरफा प्रकृति के इर्द-गिर्द घूमता है – दूसरे शब्दों में यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि आपकी मानसिक स्थिति आपकी प्रतिरक्षा कार्यप्रणाली को कैसे प्रभावित कर सकती है, बल्कि इसके विपरीत, यह इस बारे में भी है कि आपकी प्रतिरक्षा कार्यप्रणाली आपकी मानसिक स्थिति को कैसे प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा, यह भी कि हम कैसे सोचते हैं, तनाव का सामना करते हैं और अपने शारीरिक स्वास्थ्य के मुद्दों को देखते हैं हमारे मन-शरीर के संबंध को प्रभावित कर सकता है।

उदाहरण के लिए, लोग एक ही तनाव के लिए बहुत अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। एक व्यक्ति अपने काम में किसी के द्वारा निकाली गई गलती को अपने कौशल में सुधार लाने या आलोचक को गलत साबित करने की चुनौती के रूप में ले सकता है और दूसरा व्यक्ति इसी तरह की आलोचना का जवाब खुद को मानसिक रूप से डांटकर और भविष्य में आने वाली आलोचनाओं के बारे में लगातार चिंता करके दे सकता है। इससे हृदय गति में वृद्धि, अस्वास्थ्यकर भोजन खाना या सिरदर्द हो सकता है।

एक उदाहरण उन लोगों का भी है, जिन्हें कोई पुराना दर्द हो। कभी-कभी लोग शारीरिक चिंता के कारण लगातार या रुक-रुक कर होने वाले दर्द का अनुभव करते हैं। यदि वे स्वस्थ होने की कोशिश करते हुए दर्द को एक असुविधा के रूप में स्वीकार करने में सक्षम होते हैं, तो समय के साथ इसमें सुधार होने की अधिक संभावना है। दूसरी ओर, यदि वे दर्द की वजह से निराश, नाराज और बार-बार क्रोधित हो जाते हैं, तो ये विचार और भावनाएं दर्द को और उसकी आवृत्ति को बढ़ा सकती हैं। तब निराशा उन्हें स्वस्थ होने की कोशिश करने से रोक सकती है।

लगातार तनाव, भावनात्मक समस्याएं और आम तौर पर नकारात्मक दृष्टिकोण भी रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को कम कर सकते हैं और यहाँ तक कि जीवनकाल को भी कम कर सकते हैं।

क्या मैं अपने मन-शरीर के संबंध को सुधार सकता हूँ?

अपनी भावनात्मक परेशानियों से निपटने और शारीरिक समस्याओं को हल करने के तरीकों को बदलना अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। यदि आप स्वास्थ्य के अन्य क्षेत्रों जैसे कि मनोदशा और दृष्टिकोण के साथ भी संघर्ष कर रहे हैं, तो उसके लिए समर्थन प्राप्त करना यहाँ भी मदद कर सकता है।

विशेष प्रकार की थेरेपी, जैसे कि संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, या सीबीटी, आपको नकारात्मक सोच पैटर्न जो मानसिक कल्याण को खराब करता है, को बदलने में मदद कर सकती है। और यह आगे आपको उन बाधाओं से निपटने में मदद करता है जो आपके शारीरिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं की देखभाल करने के रास्ते में आती हैं।

स्वास्थ्य में सुधार के अन्य बुनियादी तरीकों में स्वस्थ आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल हैं। शरीर की देखभाल करने से मन की रक्षा होती है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ लोगों के लिए व्यायाम बढ़ाना अवसाद को कम करने में काम आता है। कई शारीरिक लाभों के अलावा हम सभी जानते हैं कि, व्यायाम वास्तव में तंत्रिका कोशिका (नर्व सेल) के संबंधों में सुधार ला सकता है, जिससे मस्तिष्क बेहतर काम करता है।

कई अध्ययनों ने सचेतन के लाभों को भी पहचाना है, जो मस्तिष्क को फिर से संगठित करने में मदद कर सकता है और तनाव के प्रति प्रतिक्रिया करने की क्षमता में सुधार ला सकता है। जो लोग सचेतन का अभ्यास करते हैं वे अक्सर कम उत्तेजित महसूस करते हैं, कठिन परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभालते हैं, और सामान्य रूप से कम तनावग्रस्त होते हैं, चाहे उनकी परिस्थितियों में कोई बदलाव न आया हो।

यदि आप गंभीर लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो इनके बारे में बात करने के लिए अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करना ज़रूरी है। एक थेरेपिस्ट से बात करने से आपको किसी भी अनुपचारित मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का प्रबंधन करने और साथ ही आपके शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी सहायता मिलेगी। यदि आपको सेवाओं तक पहुँचने में सहायता की आवश्यकता है और आप यू.एस. में हैं तो आप सब्सटांस एब्यूज एंड मेन्टल हेल्थ सर्विसेस एडमिनिस्ट्रेशन (SAMHSA) से संपर्क कर सकते हैं।

अपने मन-शरीर के संबंध को बेहतर बनाने के लिए आज ही से शुरू करने वाले कई विकल्प हैं। कई गतिविधियाँ मानसिक और शारीरिक गतिविधियों को कूटनीतिक रूप से जोड़ती हैं। इनके उदाहरणों में शामिल हैं योग, एक नया नृत्य सीखना (जो शरीर और मस्तिष्क की मदद करता है), ताई ची, या बस सचेत रूप से चलना। यदि आपके यहाँ सामाजिक दूरी बनाए रखने की आवयश्कता की वजह से इन गतिविधियों तक पहुँचना आपके लिए मुश्किल है, तो ज़ूम क्लास लेने, एक बिलकुल नई गतिविधि की कोशिश करने या ऑनलाइन एक मजेदार व्यायाम वीडियो को देखकर करने पर विचार करें। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल करने का सबसे सही समय हो सकता है।